क्या दिन आ गए न : कुरान पढ़ाने के लिए पैसा है सरकारों के पास वेद के लिए नहीं 1 रुपया



क्या दिन आ गए न : कुरान पढ़ाने के लिए पैसा है सरकारों के पास वेद के लिए नहीं 1 रुपया 
वैसे सेक्युलर देश में हिन्दू का ये हाल तो होना ही था 
वेद तो लुप्त हो ही जायेंगे, इस देश में बच जायेगा कुरान 

हमारी सरकारों के पास कुरआन पढ़ाने के लिए बहुत पैसा है 
क्या केंद्र सरकार हो और क्या हो राज्य सरकारें, सभी की सभी मदरसे चलाने के लिए हर साल करोडो रुपए बजट में देते है 

मदरसे में कुरान पढाई जाती है, और क्या क्या किया जाता है वो सब पूरी दुनिया जानती है, खैर 

अब हम आपको हाल दिखाते है भारत के एक वेद पाठशाला का, यहाँ वेद पढ़ाये जाते है 
वेद भारतीय संस्कृति ही है, बिना वेद के भारत की कल्पना भी नहीं की जा सकती 

ये वेद पाठशाला है तेलंगाना राज्य के मंचारिएल जिले के थांडुर मंडल के अचलापुर गाँव में 
जो की आज से 65 साल पहले बनाया गया था की, यहाँ विधार्थियों को वेद पढ़ाये जायेंगे, अब इस पाठशाला में फीस तो ली नहीं जाती, वेद पाठशाला में फीस लेने का नियम है नहीं, तो लोगों के दान से ही ये पाठशाला 65 वर्षों से चल रहा है 


पर समय के साथ लोग भी अधिक सेक्युलर अधिक मॉडर्न हो गए 
अब 5 रुपए भी किसी की जेब से तो निकलता नहीं, इस वेद पाठशाला को चलाने में अब दिक्कते आ रही है 

दुद्दीला मनोहर 1972 से इस वेद पाठशाला को चला रहे है 
दुद्दीला मनोहर कहते है की हमे अब पाठशाला को चलाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है 
पाठशाला के संचालन में धन की कमी आ रही है, और बड़ी मुश्किल से जैसे तैसे करके वेद पाठशाला को आज भी हम चला रहे है

दुद्दीला मनोहर का कहना है की सरकार से हम मदद मांगते है पर कुछ भी मदद आजतक मिली नहीं 
दुद्दीला मनोहर बताते है की गाय का दूध और गोबर से बने उपले बेचकर जैसे तैसे पाठशाला को चला रहे है 

ये स्तिथि है आज भारत में वेद पढ़ाने वाले एक पाठशाला की
मदरसों को ऐसी कोई दिक्कत नहीं है, चूँकि सरकारों के पास मदरसे चलाने के पैसे तो है 
पर वेद पाठशाला को कौन सरकार पूछ रहा है

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