सामने से चल रही थी गोलियां ?, पर 1 भी गोली बस के सामने वाले हिस्से में नहीं लगी, चमत्कार नहीं ?


लगभग सभी मीडिया चैनल कह रहे हैं कि ड्राईवर सलीम ने बहादुरी दिखाकर 50-60 अमरनाथ यात्रियों की जान बचा ली, कई लोग उसे हीरो बता रहे हैं तो कई लोग पता नहीं क्या क्या बोल रहे हैं लेकिन हम अपने दावे से साबित कर सकते हैं कि आतंकियों ने जान बूझकर ड्राईवर सलीम पर फायरिंग नहीं की क्योंकि बस के सामने का शीशा टूटा ही नहीं, अगर आतंकी सामने से गोलियां चलाते तो बस का शीशा टूट जाता और ज्यादा यात्री मारे जाते, यही नहीं सलीम को भी गोलियां जरूर लगतीं लेकिन आतंकियों ने ऐसा जान बूझकर नहीं किया, आतंकियों ने ड्राईवर सलीम पर गोलियां क्यों नहीं चलायीं, यह जांच का विषय हो सकता है.

अब हम बताते हैं कि आतंकियों ने ड्राईवर सलीम को क्यों नहीं मारा, अगर वे चाहते तो ड्राईवर सलीम को आसानी से मार सकते थे, अगर वे चाहते तो सामने से बस पर फायरिंग करते, अगर वे चाहते तो बस के टायर में गोली मारकर उसे पंक्चर कर देते और उसके बाद सभी लोगों को मार डालते लेकिन आतंकी चाहते थे कि ड्राईवर बच जाय ताकि सभी लोगों को ले जा सके.

आपको पता होना चाहिए कि आतंकियों का मकसद सिर्फ आतंक फैलाना होता है, वे चाहते हैं कि आदमी कम मरें लेकिन लोग ज्यादा डरें जिसमें वे कामयाब भी हुए हैं, पूरे देश में आतंकवादी हमले की चर्चा हो रही है, जगह जगह सुरक्षाबल तैनात कर दिए गए हैं. लोग अमरनाथ यात्रा पर जाने से डरने लगे हैं, आतंकी यही चाहते थे और उनके मंसूबे सफल हो गए हैं.

सलीम को क्यों बनाया जा रहा हीरो

भारत के मीडिया चैनलों को सिर्फ खबर चाहिए, वे बिना जांच पड़ताल के किसी को भी हीरो और किसी को भी आतंकवादी बना देते हैं और बढ़ा चढ़ाकर ख़बरें दिखाकर अपनी TRP बढ़ाते हैं लेकिन जब बड़े बड़े नेता और मुख्यमंत्री मीडिया की बातों में आकर नासमझी भरे फैसले लेते हैं तो देखकर अफ़सोस होता है. गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने ऐसी ही नासमझी दिखाकर उस ड्राईवर को हीरो बना दिया है जिसे तुरंत हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ करनी चाहिए और आतंकी हमले की असलियत जाननी चाहिए.

आप खुद सोचिये, जो ड्राईवर भोले भाले यात्रियों को झूठ बोलकर अमरनाथ श्राइन बोर्ड में बिना बस का रजिस्ट्रेशन कराए ही उन्हें अमरनाथ दर्शन कराने चला गया और जिसकी वजह से 7 निर्दोष यात्रियों की जान चली गयी, उसे ही मीडिया हीरो बना रही है और गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी उसके लिए वीरता पुरस्कार की घोषणा कर दिए.

भाई कम से कम ड्राईवर सलीम से यह तो पूछिए कि उसनें बस का रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं कराया, यात्रियों से क्यों झूठ बोला, उससे ये पूछिए कि वह भक्तों के काफिले से पीछे क्यों रह गया, जब उसकी बस पंक्चर हुई तो उसनें सुरक्षाबलों से क्यों नहीं बताया, अगर बस पंक्चर हुई तो उसे बनाने में इतना समय कैसे लग गया जबकि पंक्चर वाले टायर को बदलने में ज्यादा से ज्यादा आधे घंटे लगते हैं लेकिन उसे 2 घंटे कैसे लग गए.

इसके अलावा सलीम से यह भी पूछा जाना चाहिए कि अगर पंक्चर ठीक करने में 2 घंटे लग गए और रात हो गयी तो बस को किसी सुरक्षित जगह पर क्यों नहीं रोका, बिना सुरक्षा के बस क्यों चलाई और बस को अलग रास्ते पर क्यों ले गया. उसनें किसी को फोन क्यों नहीं किया, किसी से मदद क्यों नहीं माँगी. 

सलीम से यह भी पूछा जाना चाहिए कि जब वह बस चला रहा था और आतंकियों ने फायरिंग कर दी तो उसे गोलियां क्यों नहीं लगी जबकि ड्राईवर सबसे खतरे वाली सीट पर होता है, अँधाधुंध फायरिंग के बाद ड्राईवर को गोली लगने के सबसे अधिक चांसेस होते हैं लेकिन उसे एक खरोच तक नहीं आयी, उससे यह भी पूछा जाना चाहिए कि आतंकियों ने उसके ऊपर गोली क्यों नहीं चलाई जबकि आतंकी सबसे पहले ड्राईवर को गोली मार देते हैं ताकि उन्हें ऐसे हमले करने में आसानी हो.

सलीम के बताये अनुसार वह दो किलोमीटर तक बिना देखे ही बस चलाता रहा, यह कैसे हो सकता है, खराब रास्ते पर बिना देखे कोई ड्राईवर बस कैसे चला सकता है, कहीं ऐसा तो नहीं है कि आतंकियों ने जान बूझकर उस पर गोली नहीं चलाई. कहीं ऐसा तो नहीं है कि कोई बड़ी साजिश की गयी हो.

सरकार ने सलीम को आनन फानन में हीरो बनाकर अपनी कमीं छुपाने का प्रयास किया है, लोग कह रहे हैं कि सलीम ने हिन्दुओं की रक्षा की है, अगर सलीम नहीं होता तो 50-60 हिन्दू यात्रियों की मौत हो जाती, भाई यह क्यों नहीं सोचते कि अगर अगर सलीम नहीं होता तो 7 यात्रियों की मौत ही नहीं होती क्योंकि सलीम ने नियम का उल्लंघन किया, थोड़े से पैसों के लालच में उसनें बस का रजिस्ट्रेशन ही नहीं कराया, बस को अलग रूट पर ले गया, किसी से मदद नहीं माँगी, बिना सुरक्षा के बस को रात में आतंक प्रभावित इलाके में घुमाता रहा.

सलीम से कई सवाल पूछे जा सकते हैं, अगर नियम का उल्लंघन करने वाले ड्राईवरों को ऐसे ही हीरो बनाया जाने लगेगा तो अमरनाथ श्राइन बोर्ड में कोई यात्रा का रजिस्ट्रेशन ही नहीं कराएगा, यात्रियों को ऐसे ही खतरे में डाला जाता रहेगा, ऐसे ही लोग मरते रहेंगे, हाँ सलीम खान जरूर हीरो माना जाता अगर उसनें बस का यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया होता, थोडा सा शुल्क अमरनाथ श्राइन बोर्ड को दिया होता. लेकिन थोड़े से पैसों के लालच में नियम तोड़ने वाले और 7 अमरनाथ यात्रियों को मरवाने वाले ड्राईवर को वीरता पुरष्कार देने की सिफारिश करना समझ से परे है. अब इस देश का भगवान ही मालिक है.
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